मुंबई बनाती है इंसान को मज़बूत....................
आमची मुंबई, रात हो या दिन, सुबह हो या शाम मुंबई में लोंग हर पल एक नए जोश के साथ दौडते नज़र आते है। इस शहर की सड़के रातो में भी गुलज़ार रहती है। सपनो के इस शहर में हर रोज़ सैकड़ो लोग आँखों में सपने लिए आते है। आसमान की बुलंदियों पर अपना नाम लिखने की चाहत दिल में लेकर आनेवाले इन अंजान मुसाफिरों का मुंबई में खुले दिल से स्वागत करती है। इस शहर के लिए कहा जाता है कि एक बार जो यंहा आ जाता है, वो फिर लौटकर नहीं जाता। मुंबई से अनजाने मुसाफिरों के इस रिश्ते के पीछे मुंबई की ज़िंदादिली है। भले ही यंहा आनेवाले लोगो को आते ही शहर में काम ना मिले, रात फुटपाथ पर सोकर गुजारनी पड़े, लेकिन एक बार जिसने मुबंई की इस अग्निपरीक्षा को पार कर लिया। फिर वो कभी पीछे मुड़कर नहीं देखता। ऐसे न जाने कितने ही लोग है जो मुंबई में आएं और यही के होकर रह गए। गुजरे जमाने के कई फिल्मी सितारो ने सफलता की बुलंदियों को छूने से पहले कई राते मुंबई के फुटपाथ पर काटी है। दौड़ता भागता ये शहर इंसान को इतना मज़बूत बना देता है कि जिंदगी कि हर मुश्किल को वो हँसते- हँसते पार कर जाता है।
नितिन बिनेकर

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